DUAC - Delhi Urban Art Commission
खुले हवादार परिसरों का प्रावधान व विन्यास
दिल्ली में पूर्व आबाद शहर शाहजहांनाबाद और नव विकसित नई दिल्ली के बीच खुले हवादार परिसरों का पूरा खुशनुमा ताना-बाना था । पिछले 50 वर्षों में शहरीकरण की प्रक्रिया के अन्तर्गत शहर के कई हिस्सों को एक तय-शुदा व्यवस्था के अन्तर्गत खुले हवादार परिसरों के साथ नियोजित करने का तय किया गया तथा उस स्थानीय शैली की बजाय इग्लैंड की नगर नियोजन शैली पर आधारित किया गया था । उसके अन्तर्गत बड़े-बड़े नाले, रिज क्षेत्र और बड़ी संख्या में स्मारकों के महत्व को स्वीकार करते हुए, उनके आस-पास के क्षेत्र को हवादार खुले परिसरों के रूप में रखा गया था ।
फलत: इसका एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि शहर में बड़ी संख्या में खुले हवादार मैदान देखने में आते हैं लेकिन उनका ताना-बाना और जो स्थिति है वह साफ-सुथरी नहीं है । उदाहरण के लिए इन खुले मैदानों का क्या उपयोग होगा, कौन-कौन से घटक इसमें शामिल होंगे, उनके विन्यास का पैमाना क्या होगा, यह कहीं पर भी स्पष्ट नहीं किया गया है । फलत: इन खुले परिसरों का पर्यावरणीय और उपयोगजन्य मूल्य अभी भी स्पष्ट नहीं है ।
इस अध्ययन का उद्देश्य दिल्ली में खुले परिसरों के प्रावधानों को यत्र-तत्र बिखरे हुए हरित क्षेत्रों की बजाय एक सुसंगत नेटवर्क के रूप में मान्यता देने का है । इस प्रयास के लिए खुले परिसरों बावत संगत संबंध, पहुंच, उपयोग, प्रयोगकर्ताओं और पैदलपथिकों की सुरक्षा के अनुकूल पर्यावरण की संभावनाओं के बीच परस्पर तालमेल पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है ।
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