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दिल्ली नगर कला आयोग
(संसद के एक अधिनियम, भारत सरकार के अधीन एक सांविधिक निकाय)

भाषा: हिंदी | English
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तीव्र लिंक

कार्यालय का पता

दिल्ली नगर कला आयोग (दि.न.क.आ.)

कोर-6ए,यू.जी तथा  प्रथम तल, भारत पर्यावास केन्द्र,

लोधी रोड, नई दिल्ली - 110003

ई-मेल - duac1974@gmail.com,

फोन - 011 - 24619593

फैक्स - 011 - 24648970

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उद्देश्य, अधिकार क्षेत्र तथा दिशानिर्देश

 

लक्ष्य, क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ तथा परियोजनाएं प्रस्तुत करने के लिए दिशानिर्देश

ऐतिहासिक नगर दिल्ली कई युगों से कई राज्यों और साम्राज्यों की राजधानी रहा है यहाँ के भव्य स्मारक इसके गौरवशाली अतीत के प्रतीक हैं

लुट्येन्ज की नई दिल्ली अब तक बनाई गई उद्यान नगर राजधानियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है परन्तु स्वतन्त्रता के बाद दिल्ली अचानक बढ़ी और बहुत बढ़ी दुर्भाग्यवश यह विस्तार अव्यवस्थित और बेतरतीब था

सौभाग्यवश, बहुत अव्यवस्था हो इसके पहले ही राजधानी की मास्टर योजना तैयार करने के लिए भारत सरकार ने एक योजना बोर्ड का गठन किया ताकि शहर का सुव्यवस्थित विस्तार हो और शहर के स्वरूप और खूबसूरती की रक्षा की जा सके और इस प्रकार उसके गौरवपूर्ण अतीत की भी रक्षा की जा सके

दिल्ली के विकास के लिए 1962 में सरकार द्वारा एक मास्टर योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अधिनियम के अधीन एक योजना और विकास प्राधिकरण गठित किया गया जिसका नाम दिल्ली विकास प्राधिकरण था

दिल्ली मास्टर योजना और दिल्ली विकास प्राधिकरण के एक दशक से अधिक कार्य करने के बावजूद सुरूचिपूर्ण और कार्यात्मक अर्थों में हमने दिल्ली को रहने और काम करने लायक जगह बनाने की दिशा में कोई विशेष प्रगति नहीं की है दिल्ली विकास प्राधिकरण और अन्य दो स्थानीय निकाय मुख्य रूप से द्वि आयामी क्षेत्रीय विकास येाजना, भूमि उपयोग और क्षेत्रीय और भवन निर्माण उप नियमों को लागू किए जाने के लिए कार्य करते रहे हैं, विशेष कर कार्यात्मक और इन्जीनियरी दृष्टि से

शहर के विभिन्न भागों का विकास, पुनर्विकास, अनुरक्षण और परिरक्षण करते समय शहर के प्राकृतिक वातावरण और स्वरूप पर बहुत कम ध्यान दिया गया है सुरूचि और सौन्दर्य की दृष्टि से दिल्ली को, कम से कम उसके अधिकांश भाग को, बहुत अधिक खूबसूरत बनाया जा सकता है असल से सिर्फ लापरवाही और उदासीनता के कारण कुछ बहुत सुन्दर क्षेत्र बरबाद हो गए हैं पिछले कुछ समय से शहर की खूबसूरती और उसके सांस्कृतिक मूल्यों के परिवेश सम्बंधी डिज़ाइन के मार्गदर्शन और नियन्त्रण के लिए एक उच्चस्तरीय डिज़ाइन समीक्षा बोर्ड/आयोग की स्थापना की आवश्यकता महसूस की जा रही है

दिल्ली के नगरीय और परिवेश सम्बंधी डिज़ाइन का सुरूचिपूर्ण परिरक्षण, विकास और अनुरक्षण करने की दृष्टि से भारत सरकार ने संसद के एक अधिनियम, जिसका नाम दिल्ली नगर कला अधिनियम (1973-1974 का एक) है, के अधीन दिल्ली नगर कला आयोग की स्थापना की है यह अधिनियम 1 मई, 1974 से लागू हुआ है

1.2 आयोग के लक्ष्य है :-

) वातावरण में उन गुणों का विकास करना जो समाज को मूल्य प्रदान करते हैं

) रहने और काम करने लायक जगह के रूप में समाज की मनोहरता और कार्यात्मक उपयोगिता का विकास करना

) जिन क्षेत्रों का अपना अलग अस्तित्व हो या जो विशेष ऐतिहासिक महत्व के हों उनकी सम्पूर्णता की रक्षा करके अपने अतीत के स्वरूप और गुण को सुरक्षित रखना

) इस क्षेत्र के कतिपय सार्वजनिक निवेशों की रक्षा करना

.) खराब डिज़ाइनों से बचाव और अच्छे डिज़ाइनों को प्रोत्साहन देना

) समुदाय के वातावरण की कोटि के लिए इसकी अपेक्षाओं के स्तर को ऊंचा करना

1.3 दिल्ली नगर कला आयोग की दो मुख्य जिम्मेदारियाँ हैं :-

(i) दिल्ली के नगरीय और परिवेश सम्बंधी डिज़ाइन के सुरूचिपूर्ण, विकास और अनुरक्षण के मामलों में केन्दीय सरकार को सलाह देना, और

(ii) किसी ऐसे भवन और इंजीनियरी कार्य की किसी परियोजना या किसी ऐसे विकास प्रस्ताव के सम्बंध में स्थानीय प्राधिकारियों को सलाह देना जिसके कारण वातावरण या वहां बनाई गई किसी सार्वजनिक सुविधा के सौन्दर्य पर असर पड़ता हो या असर पड़ने की सम्भावना हो

(i) में उल्लिखित कार्यों के सम्बंध में, यह आयोग स्वयं बहुत पहल करके स्थानीय निकायों और सरकारी संगठनों को सड़क पर बने हुए किसी ऐसे फर्नीचर, ऐतिहासिक स्मारक में किए गए ऐसे परिवर्धन और परिवर्तन, सार्वजनिक उद्यानों में स्थित ऐसी आकृतियों, होर्डिंग चिन्ह बिलबोर्ड झरनों इत्यादि को सुधारने या हटाने का निर्देश दे सकता है जो आयोग की दृष्टि में सौन्दर्य परकता के लिहाज से या नागरिक कार्यात्मक डिज़ाइन की दृष्टि से आपत्तिजनक हो जब कभी आयोग से विशेष रूप से सलाह मांगी जाएगी तब नगर और परिवेश सम्बंधी डिज़ाइन की सौन्दर्यपरकता के सम्बंध में आयोग केन्द्र सरकार और स्थानीय निकायों को सलाह भी देगा आयोग दिल्ली के किसी ऐसे क्षेत्र को उन्नत करने का जिम्मा ले सकता है और उसका विकास पुनर्विकास या सजावट करा सकता है जिसके सम्बंध में किसी स्थानीय निकाय से कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ हो {अधिनियम का अध्याय III-धारा II (3)}

1.4 उपर्युक्त (ii) के कार्यों के सम्बंध में, अर्थात् नई परियोजनाओं के सम्बंध में स्थानीय निकायों का सलाह देना, आयोग ऐसे भवनों या इंजीनियरी कार्यों या विकास, पुनर्विकास योजनाओं के सम्बंध में प्रस्तावों की संवीक्षा करेगा, स्वीकृति देगा, उन्हें अस्वीकार करेगा या उनमें संशोधन करेगा जिनके कारण वातावरण की सौन्दर्यपरकता या वहां बनाई गई किसी सार्वजनिक सुविधा पर असर पड़ता हो या उसर पड़ने की सम्भावना हो किसी भी भवन और इंजीनियरी कार्य और विकास प्रस्ताव को स्वीकृति देने से पहले प्रत्येक स्थानीय निकाय को अधिनियम के अधीन आयोग से अनुमति लेनी होगी

 

1.5 अधिनियम के अध्याय III की धारा 12, 13, 14 और 15 में स्थानीय निकायों के दायित्वों का इनके बारे में स्पष्ट उल्लेख किया गया है - केन्द्र सरकार को अपील की व्यवस्था - निर्णय को संशोधित करने की केन्द्र सरकार की शक्ति एवं आयोग की शक्तियां

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